नक्सलवाद क्या है?: Naxalvaad kya hai?

January 24, 2025
नक्सलवाद क्या है
Quick Summary

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  • नक्सलवाद की शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से हुई थी।
  • चारु मजूमदार और कानू सान्याल ने सशस्त्र आंदोलन का नेतृत्व किया।
  • मजूमदार माओत्से तुंग के प्रशंसक थे, इसलिए नक्सलवाद को ‘माओवाद’ भी कहा जाता है।
  • नक्सलवाद का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को समाप्त करना है।

Table of Contents

नक्सलवाद क्या है? नक्सलवाद, जिसे माओवादी आंदोलन भी कहा जाता है, भारत में एक प्रमुख उग्रवादी आंदोलन है। इसकी शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से हुई थी, जहां चारू मजूमदार और कानू सान्याल ने किसानों के अधिकारों के लिए सशस्त्र विद्रोह का नेतृत्व किया। नक्सलवाद का मुख्य उद्देश्य भूमि सुधार और सामाजिक असमानता के खिलाफ लड़ाई है। यह आंदोलन मुख्य रूप से माओवादी विचारधारा पर आधारित है, जो मानती है कि समाज में व्याप्त अन्याय और शोषण को समाप्त करने के लिए हिंसक संघर्ष आवश्यक है।

आज, नक्सलवाद भारत के कई राज्यों में सक्रिय है और यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। इस आंदोलन के कारण और प्रभाव को समझना आवश्यक है ताकि इसके समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें।

इस ब्लॉग में जानेंगे नक्सलवाद क्या है, इसकी उत्पत्ति, अर्बन नक्सलवाद क्या है, छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के कारण, भारत में इसके प्रमुख कारण, प्रभाव और इसे रोकने के उपाय। 

नक्सलवाद क्या है? (Naxalvaad kya hai?)

नक्सलवाद क्या है? नक्सलवाद भारत में एक उग्रवादी आंदोलन है, जो मुख्य रूप से मार्क्सवादी और माओवादी विचारधारा पर आधारित है। इसका नाम पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से लिया गया है, जहां 1967 में एक किसानों के विद्रोह ने इस आंदोलन की शुरुआत की थी।

नक्सलवाद का मुख्य उद्देश्य भूमि सुधार और समाज में असमानता के खिलाफ लड़ाई है। नक्सली समूह आमतौर पर सशस्त्र संघर्ष का सहारा लेते हैं और राज्य के खिलाफ हिंसक क्रियाओं को अंजाम देते हैं। इनका मानना है कि वर्तमान सरकार और सामाजिक ढांचे में गरीब और वंचित वर्गों के अधिकारों की उपेक्षा की जाती है।

नक्सलवाद के चरण

नक्सलवाद के तीन प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं:

1. प्रथम चरण (1967-1980)

  • वैचारिक और आदर्शवादी आंदोलन: इस चरण में नक्सलवाद मार्क्सवादी-लेनिनवादी-माओवाद पर आधारित था, जो एक विचारधारात्मक आंदोलन था।
  • राष्ट्रीय पहचान: नक्सलवादियों को राष्ट्रीय पहचान मिली, लेकिन ज़मीनी अनुभव और व्यावहारिकता की कमी महसूस हुई।
  • संघर्ष की चुनौतियाँ: संगठनात्मक कमजोरियाँ और अनुभव की कमी नक्सलवादियों के लिए बड़ी बाधा बनी।

2. द्वितीय चरण (1980-2004)

  • व्यावहारिक विकास: इस दौर में नक्सलवाद ने क्षेत्रीय ज़रूरतों और अनुभवों के आधार पर विकास किया।
  • क्षेत्रीय विस्तार: नक्सलवाद ने आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में अपना प्रभाव बढ़ाया और अपने आंदोलन को व्यावहारिक रूप से आगे बढ़ाया।
  • संगठन में मजबूती: नक्सलवादी समूहों ने अपनी रणनीतियों को और अधिक प्रासंगिक और मजबूत किया।

3. तृतीय चरण (2004-वर्तमान)

  • राष्ट्रीय स्वरूप और विदेशी संपर्क: 2004 के बाद नक्सलवाद का प्रभाव राष्ट्रीय स्तर तक फैल गया और विदेशों से समर्थन मिलने लगा।
  • आंतरिक चुनौती: नक्सलवाद अब भारत की सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती बन चुका है।
  • सुरक्षा बलों से संघर्ष: नक्सलवादियों ने अधिक सशस्त्र संघर्ष अपनाया, जिससे सुरक्षा बलों के साथ तनाव बढ़ा।
  • सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव: नक्सलवाद अब सामाजिक और राजनीतिक असमानताओं के खिलाफ एक बड़े आंदोलन के रूप में उभरा।

अर्बन नक्सलवाद क्या है?

अर्बन नक्सलवाद क्या है? शहरी नक्सलवाद, जिसे अर्बन नक्सलवाद भी कहा जाता है, एक आधुनिक और जटिल सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन है। यह पारंपरिक ग्रामीण नक्सलवाद से अलग है क्योंकि इसका फोकस शहरों और शहरी इलाकों में होता है। शहरी नक्सली विचारधारा के समर्थक, जिनमें शिक्षाविद, छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी शामिल हो सकते हैं, नक्सलवादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करते हैं। वे विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक माध्यमों से अपनी विचारधारा फैलाते हैं और व्यवस्था के खिलाफ असंतोष को भड़काते हैं।

भारत में नक्सलवाद के मुख्य कारण

वर्तमान में, नक्सलवाद भारत के कई राज्यों में सक्रिय है और इसे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती माना जाता है। खास करके छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के कारण पीछड़े क्षेत्रों में विकास रुका हुआ है। नक्सलवादी समूह जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में गतिविधियों को अंजाम देते हैं और अक्सर सरकारी संस्थाओं, पुलिस और अर्धसैनिक बलों पर हमले करते हैं।

एक ऐसा आंदोलन जिसका मुख्य उद्देश्य समाज के वंचित और गरीब वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें न्याय दिलाना था, यह उद्देश्य अच्छाई के लिए था लेकिन इस उद्देश्य को पाने का तरीक़ा और रास्ता दोनों ही गलत थे। कोई भी आंदोलन कुछ ही सालों में इतना ज्यादा क्रूर और हिंसक किसी एक वजह से नहीं हो सकता। इसके पीछे कई पहलू और कारण हो सकतें है । भारत में नक्सलवाद के मुख्य कारण के कुछ पहलू इस प्रकार हैं:

आर्थिक असमानता

  • भारत के कई हिस्सों में गरीबी, बेरोजगारी और भूखमरी जैसी समस्याएं फैली हुई हैं।
  • विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
  • आर्थिक संसाधनों का असमान वितरण और रोजगार के अवसरों की कमी गरीबों को विद्रोह करने पर मजबूर करती है।
  • नक्सलवादी इस आर्थिक असमानता का फायदा उठाकर गरीबों और वंचितों को अपने पक्ष में करते हैं।
  • नक्सलवादी गरीबों को सरकारी व्यवस्था के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
  • भारत में नक्सलवाद का मुख्य कारण आर्थिक असमानता है।

सामाजिक असमानता

  • सामाजिक असमानता भी भारत में नक्सलवाद का मुख्य कारण है।
  • जाति व्यवस्था, जातिगत भेदभाव और सामाजिक अन्याय गहरे तक जड़ें जमाए हुए हैं।
  • दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़े वर्गों को समान अधिकार और सम्मान नहीं मिलते।
  • इन वर्गों को अक्सर समाज में नीचा दिखाया जाता है और भेदभावपूर्ण व्यवहार का सामना करना पड़ता है।
  • सामाजिक असमानता से पीड़ित लोग नक्सलवादियों का समर्थन करते हैं।
  • वे अपने साथ हुए अन्याय का बदला लेना चाहते हैं।

राजनीतिक कारण

  • राजनीतिक कारण नक्सलवाद के उभरने में अहम भूमिका निभाते हैं।
  • कई बार सरकार और प्रशासन की नीतियाँ गरीब और वंचित वर्गों के पक्ष में नहीं होतीं।
  • विकास योजनाओं और संसाधनों का लाभ निम्न वर्गों तक नहीं पहुँचता।
  • राजनीतिक नेताओं की उपेक्षा और भ्रष्टाचार नक्सलवाद को बढ़ावा देते हैं।
  • लोग जब महसूस करते हैं कि उनके अधिकारों की रक्षा करने वाला कोई नहीं है, तो वे नक्सलवादियों का समर्थन करने लगते हैं।
  • नक्सलवादी उन्हें न्याय और अधिकारों की लड़ाई का भरोसा दिलाते हैं।
  • सरकार की गलत नीतियों से नक्सलवाद का उदय और उभार होता है।

शोषण और अन्याय

  • भारत में नक्सलवाद का मुख्य कारण शोषण और अन्याय भी हैं।
  • वंचित और गरीब वर्गों के लोग अक्सर जमींदारों, उद्योगपतियों और सरकारी अधिकारियों द्वारा शोषित होते हैं।
  • उनकी जमीनें छीन ली जाती हैं, उन्हें न्यूनतम मजदूरी दी जाती है और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है।
  • आदिवासी इलाकों में खनन और अन्य विकास परियोजनाओं के नाम पर लोगों को उनके घरों से बेदखल किया जाता है।
  • जब लोग अपने अधिकारों की लड़ाई में असफल हो जाते हैं, तो वे नक्सलवाद का रास्ता चुनते हैं।

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के कारण

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के कारण पर गौर किया जाएँ तो मुख्य रूप से  भौगोलिक कारण, आदिवासी असंतोष, और मूलभूत सुविधाओं की कमी का होना सामने आता हैं। इन कारणों को आसान भाषा में समझते है।

भौगोलिक कारण

छत्तीसगढ़ का भूगोल नक्सलवाद के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह राज्य घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जो नक्सलवादियों के लिए सुरक्षित ठिकाने और छिपने के स्थान प्रदान करते हैं। इन जंगलों में सरकारी सुरक्षा बलों के लिए नक्सलियों का पता लगाना और उनके खिलाफ ऑपरेशन चलाना कठिन होता है। इसके अलावा, ग्रामीण इलाकों में सड़कों और संचार सुविधाओं की कमी के कारण सुरक्षा बलों को समय पर सूचना नहीं मिल पाती और वे जल्दी से कार्रवाई नहीं कर पाते। यह भौगोलिक स्थिति नक्सलवादियों को अपनी गतिविधियों को गुप्त और सुरक्षित रखने में मदद करती है इसीलिए छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के कारण में यह एक सीधा कारण है।

आदिवासी असंतोष

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का एक कारण आदिवासी असंतोष है। इस राज्य में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय निवास करते हैं, जिनके साथ अक्सर भेदभावपूर्ण और अन्यायपूर्ण व्यवहार होता है। आदिवासियों की जमीनें कोयले की खदानों में बदल दी जाती है और विकास परियोजनाओं के लिए ले ली जाती हैं, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा या पुनर्वास नहीं मिलता। इसके अलावा, उनकी पारंपरिक आजीविका के साधन छिन जाते हैं और वे अपनी सांस्कृतिक पहचान खोने लगते हैं। इन कारणों से आदिवासी समुदाय में असंतोष और आक्रोश बढ़ता है।

मूलभूत सुविधाओं की कमी

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, और रोजगार जैसी आवश्यक सेवाएं यहाँ के लोगों तक नहीं पहुँच पातीं। कई गांवों में स्कूल और अस्पतालों की हालत खराब है और शिक्षक व डॉक्टरों की कमी है। बेरोजगारी और गरीबी के कारण लोग अपने परिवारों का भरण-पोषण करने में असमर्थ होते हैं। इन समस्याओं का समाधान नहीं होने के कारण लोग निराश हो जाते हैं और उन्हें लगता है कि सरकार उनकी समस्याओं को हल करने में असफल रही है। जबकि सच ये है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के कारण ही मूलभूत सुविधाएँ इन क्षेत्रों तक नहीं पहुँच पाई है। नक्सलवाद का एक कारण इन्हीं मूलभूत सुविधाओं की कमी भी है।

नक्सलवाद को रोकने के उपाय

भारत में नक्सलवाद का प्रभाव कई स्तरों पर महसूस किया जाता है। इसके प्रमुख प्रभावों को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:

  • सुरक्षा और शांति का संकट: नक्सलवाद ने कई राज्यों में सुरक्षा और शांति की स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। हिंसा, आतंकवाद और संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे सामान्य जीवन प्रभावित होता है।
  • आर्थिक विकास पर असर: नक्सलवादी गतिविधियों के कारण कई विकास परियोजनाओं में रुकावट आती है, विशेषकर आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में। खनन, सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों में बाधाएं आती हैं।
  • समाज में भय और अशांति: नक्सलवाद से प्रभावित इलाकों में भय और असुरक्षा का माहौल होता है। लोग आतंकित रहते हैं और यह समाज में विभाजन और अशांति पैदा करता है।
  • मानवाधिकार उल्लंघन: नक्सलवाद के चलते सुरक्षा बलों और नक्सलवादियों के बीच संघर्षों में मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाएं होती हैं। अक्सर निर्दोष नागरिक भी इसके शिकार होते हैं।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रभाव: नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बहुत खराब होती है। इन क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं तक पहुँच सीमित होती है।
  • राजनीतिक अस्थिरता: नक्सलवाद ने कई राज्यों में राजनीतिक अस्थिरता को जन्म दिया है। स्थानीय सरकारें और प्रशासन नक्सलवादियों से निपटने में व्यस्त रहते हैं, जिससे अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया जा पाता।
  • आदिवासी समुदायों का शोषण: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के कारण आदिवासी समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा और उनकी सामाजिक स्थिति में और अधिक दिक्कतें आई हैं। नक्सलवादी आंदोलनों का लाभ उठाकर वे अपनी स्थिति सुधारने की कोशिश करते हैं, लेकिन इससे पूरी तरह से समाधान नहीं निकलता।

भारत में नक्सलवाद का प्रभाव

नक्सलवाद के कारण देश में आम जनता और इस क्रांति की चपेट में आने वाले बेक़सूर लोगों को नुकसान झेलना पड़ता है। सामाजिक और व्यक्तिगत विकास नक्सलवाद के कारण रुक जाता है।

आर्थिक विकास और रोजगार

नक्सलवाद को रोकने के उपाय में सबसे महत्वपूर्ण उपाय आर्थिक विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाना है। सरकार को ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में विशेष ध्यान देना चाहिए, जहाँ नक्सलवाद का प्रभाव अधिक है। इन क्षेत्रों में आधारभूत संरचना, जैसे सड़कों, बिजली, और जलापूर्ति का विकास करना आवश्यक है। इसके अलावा, स्थानीय लोगों को स्वरोजगार और कृषि संबंधित योजनाओं में शामिल करके उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।

सामाजिक सुधार

सामाजिक सुधार भी नक्सलवाद के उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। समाज में जातिगत भेदभाव, असमानता और अन्याय को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। आदिवासी और अन्य पिछड़े वर्गों को उनके अधिकार और सम्मान दिलाने के लिए समाजिक जागरूकता अभियान चलाने चाहिए।

राजनीतिक सुधार

राजनीतिक सुधारों के माध्यम से भी नक्सलवाद को रोका जा सकता है। सरकार को पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ानी चाहिए ताकि भ्रष्टाचार कम हो सके और विकास के लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँच सकें। स्थानीय सरकारों और पंचायतों को सशक्त बनाना चाहिए ताकि वे लोगों की समस्याओं का समाधान कर सकें और उनकी जरूरतों को समझ सकें।

शिक्षा और जागरूकता

नक्सलवाद को रोकने के उपाय में शिक्षा और जागरूकता का भी अहम योगदान हो सकता है। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को सुधारना चाहिए और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करानी चाहिए। शिक्षा के माध्यम से लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकते हैं और हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और विकास की ओर अग्रसर हो सकते हैं। इन सभी उपायों को मिलाकर एक समग्र और समन्वित प्रयास करने से नक्सलवाद की समस्या को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।

नक्सलवाद को रोकने के उपाय है कि देश के नक्सली प्रभावित क्षेत्रों में मुख रूप से आर्थिक विकास और रोजगार बढ़े, शिक्षा और जागरूकता आए, राजनीतिक सुधार हो और सामाजिक सुधार हो।

नक्सलवाद को रोकने के सरकार की योजनाएँ

नक्सलवाद को रोकने के लिए सरकार ने कई तरह की योजनाएँ लागू की, कुछ महत्वपूर्ण योजनाएँ इस प्रकार है 

1. सुरक्षा उपाय

  • कोबरा: (COBRA – Commando Battalion for Resolute Action) सीआरपीएफ का एक विशेष बल जो नक्सलियों के खिलाफ विशेष अभियानों के लिए तैनात है।
  • संघर्ष रेखा क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती: अतिरिक्त पुलिस बलों और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की तैनाती।

2. विकास योजनाएँ

  • एकीकृत कार्य योजना (IAP): नक्सल प्रभावित जिलों में बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना।
  • अस्पष्ट क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष योजना: सड़कों, बिजली, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाओं और पेयजल सुविधाओं का विकास।

3. समाज कल्याण योजनाएँ

  • आदिवासी विकास कार्यक्रम: आदिवासी समुदायों के लिए विशेष शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार योजनाएँ।
  • पंचायती राज: ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना और निर्णय लेने की प्रक्रिया में जनता की भागीदारी बढ़ाना।

4. पुनर्वास योजनाएँ

  • सरेंडर और पुनर्वास योजना: नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने और उनके पुनर्वास के लिए प्रोत्साहन और सहायता।
  • क्षमा योजना: आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए क्षमा और पुनर्वास की विशेष योजना।

5. समुदाय और युवा उन्मुख कार्यक्रम

  • युवा रोजगार: युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए कौशल विकास और प्रशिक्षण कार्यक्रम।
  • शिक्षा: नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल और शिक्षण संस्थानों की स्थापना।

6. खुफिया और निगरानी

  • खुफिया नेटवर्क: स्थानीय पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने का नेटवर्क।
  • तकनीकी निगरानी: ड्रोन और अन्य तकनीकी साधनों का उपयोग करके नक्सली गतिविधियों की निगरानी।

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निष्कर्ष

इस ब्लॉग में आपने जाना कि नक्सलवाद क्या है (naxalvaad kya hai?)? यह एक सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन था जो भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन की वजह से उत्पन्न हुआ और जिसका उद्गम 1960 के दशक में भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के नक्सलबाड़ी गांव में हुआ था।नक्सलवादियों ने इस आंदोलन को हिंसक रूप दे दिया जो कि देश को कई तरह से नुकसान पहुँचा रहा है।

नक्सलवाद को रोकने के उपाय है कि देश के नक्सली प्रभावित क्षेत्रों में मुख रूप से आर्थिक विकास और रोजगार बढ़े, शिक्षा और जागरूकता आए, राजनीतिक सुधार हो और सामाजिक सुधार हो। साथ ही साथ इस ब्लॉग में आपने नक्सलवाद की उत्पत्ति, अर्बन नक्सलवाद क्या है(naxalvaad kya hai?), छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के कारण, भारत में इसके प्रमुख कारण, प्रभाव और इसे रोकने के उपाय जान लिए है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

नक्सलियों का मतलब क्या होता है?

नक्सली वे लोग होते हैं जो माओवादी विचारधारा का पालन करते हैं और सामाजिक एवं आर्थिक असमानताओं के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष करते हैं। उनका उद्देश्य भूमि सुधार और सामाजिक न्याय प्राप्त करना होता है, लेकिन वे हिंसक तरीकों का सहारा लेते हैं।

नक्सलियों का मकसद क्या है?

नक्सलियों का मुख्य उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को समाप्त करना है। वे भूमि सुधार, किसानों के अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए सशस्त्र संघर्ष करते हैं। उनका लक्ष्य सरकार को उखाड़ फेंकना और माओवादी विचारधारा के आधार पर एक नया समाज स्थापित करना है।

नक्सलबाड़ी आंदोलन क्या है?

नक्सलबाड़ी आंदोलन 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से शुरू हुआ एक सशस्त्र विद्रोह था। इसका उद्देश्य भूमि सुधार और किसानों के अधिकारों के लिए लड़ाई करना था, और इसने नक्सलवाद की नींव रखी।

नक्सल का मतलब क्या होता है?

नक्सल शब्द की उत्पत्ति पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से हुई है। इसका मतलब उन व्यक्तियों या समूहों से है जो माओवादी विचारधारा का पालन करते हैं और सामाजिक एवं आर्थिक असमानताओं के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष करते हैं।

नक्सलियों की क्या मांगें हैं?

नक्सलियों की मुख्य मांगें सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को समाप्त करना, भूमि सुधार करना, और किसानों के अधिकारों की रक्षा करना हैं। वे चाहते हैं कि सरकार माओवादी विचारधारा के आधार पर नीतियों को अपनाए और समाज में व्याप्त अन्याय और शोषण को समाप्त करे।

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