दांडी मार्च

दांडी मार्च 1930: भारत की आजादी पर प्रभाव

Published on February 12, 2025
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Quick Summary

  • दांडी मार्च 12 मार्च 1930 को महात्मा गांधी द्वारा शुरू किया गया था।
  • यह नमक सत्याग्रह का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के नमक कर के खिलाफ विरोध जताना था।
  • मार्च साबरमती आश्रम से शुरू होकर दांडी तक फैला था, जहां गांधीजी ने समुद्र के पानी से नमक बनाकर कानून तोड़ा।
  • यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।

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Authored by, Amay Mathur | Senior Editor

Amay Mathur is a business news reporter at Chegg.com. He previously worked for PCMag, Business Insider, The Messenger, and ZDNET as a reporter and copyeditor. His areas of coverage encompass tech, business, strategy, finance, and even space. He is a Columbia University graduate.

दांडी मार्च, जिसे नमक सत्याग्रह के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। महात्मा गांधी के नेतृत्व में 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से शुरू हुई यह यात्रा 24 दिनों में 240 मील की दूरी तय कर 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुंची। इस मार्च का उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के नमक कानून का विरोध करना था, जो भारतीयों को अपने ही देश में नमक बनाने से रोकता था। गांधीजी और उनके अनुयायियों ने समुद्र तट पर नमक बनाकर इस कानून को तोड़ा।

इस अहिंसक आंदोलन ने न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में ब्रिटिश शासन के खिलाफ जन जागरूकता और समर्थन को बढ़ावा दिया। दांडी मार्च ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी और लाखों लोगों को प्रेरित किया।

दांडी यात्रा कब हुई?

दांडी मार्च को लेकर “दांडी मार्च कब शुरू हुआ”, “दांडी यात्रा में कितने लोग थे” और “दांडी यात्रा कहाँ से शुरू हुई” ये अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न हैं। इन प्रश्नों के विस्तार निम्नलिखित हैं।

Dandi Yatra kab shuru hui?

दांडी यात्रा को लेकर पहला सवाल यह होता है की “दांडी मार्च कब हुआ था?” नमक सत्याग्रह या दांडी सत्याग्रह, 12 मार्च 1930 को महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ था और 5 अप्रैल 1930 को दांडी, गुजरात में जाकर खत्म हुआ।

नमक भारतीयों के लिए एक बुनियादी ज़रूरत थी, फिर भी अंग्रेजों ने इस पर भारी कर लगाया, जिससे गरीबों पर बोझ पड़ा। इसके विरोध में गाँधी जी ने ब्रिटिश शासन के वाइसराय लार्ड इरविन को नमक कर रद्द करने के लिए खत लिखा जिसे उन्होंने 23 जनवरी 1930 अस्वीकृत कर दिया। इसके बाद 12 मार्च 1930 को इस टैक्स के विरोध में अहिंसक सविनय अवज्ञा आंदोलन दांडी मार्च की शुरुआत हुई।

दांडी यात्रा में कितने लोग थे?

  • महात्मा गांधी के नेतृत्व में दांडी यात्रा में 78 अनुयायी शामिल थे।
  • यात्रा 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से शुरू हुई।
  • गांधी जी ने 78 अनुयायियों के साथ 241 मील की दूरी तय की।
  • यात्रा में शामिल अधिकांश लोग 20 से 30 साल के थे।
  • ये लोग देश के विभिन्न हिस्सों से आए थे।
  • बिहार के कारो बाबू भी यात्रा में शामिल थे।
  • यात्रा के दौरान भारतीयों की संख्या बढ़ती गई।
  • इसे नमक मार्च या दांडी सत्याग्रह के नाम से भी जाना जाता है।

दांडी यात्रा कितने दिन चली थी?

  • दांडी यात्रा 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से शुरू हुई।
  • यह यात्रा 6 अप्रैल 1930 को दांडी में समाप्त हुई।
  • कुल मिलाकर, यह यात्रा 24 दिन चली।
  • यात्रा के दौरान महात्मा गांधी और उनके 78 अनुयायियों ने 241 मील (388 किलोमीटर) की दूरी तय की।
  • यह यात्रा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण क्षणों में से एक थी, जिसने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया।

दांडी यात्रा कहाँ से शुरू हुई?

  • दांडी यात्रा 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से शुरू हुई।
  • यात्रा की कुल दूरी 241 मील (388 किलोमीटर) थी।
  • इसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के नमक कानून का विरोध करना था।
  • गांधी जी ने दांडी में समुद्र के पानी से नमक बनाकर सत्याग्रह किया।
  • यात्रा में 78 अनुयायी गांधी जी के साथ थे।
  • यात्रा की समाप्ति दांडी में हुई।

साबरमती आश्रम से दांडी तक का मार्ग जिस मार्ग में दांडी यात्रा हुई थी उसे अब एक ऐतिहासिक विरासत मार्ग घोषित कर दिया गया है और अब उस मार्ग को दांडी पथ के नाम से जाना जाता है।

दांडी मार्च का उद्देश्य | Dandi Yatra ka kya Uddeshy Tha?

इस मार्च का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए नमक टैक्स का विरोध करना था। यह टैक्स भारतीयों के लिए बहुत बोझिल था, खासकर गरीबों के लिए। गांधी जी का मानना था कि यह टैक्स अन्यायपूर्ण और अहिंसक था। हालांकि, दांडी मार्च के कई अन्य उद्देश्य भी थें।

  1. भारतीयों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करना: दांडी मार्च का उद्देश्य लाखों भारतीयों को प्रेरित करना और उन्हें ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने के लिए प्रोत्साहित करना था।
  2. अहिंसा का संदेश देना: दांडी मार्च अहिंसक तरीके से विरोध करने का एक शक्तिशाली प्रदर्शन था। गांधी जी का मानना था कि स्वतंत्रता अहिंसा और सत्याग्रह (सत्य के लिए आग्रह) के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है।
  3. राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना: दांडी मार्च का उद्देश विभिन्न जातियों, धर्मों और क्षेत्रों के लोगों को एकजुट करना था। जिससे भारत में राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत किया जा सके।

दांडी मार्च की महत्वपूर्ण घटनाएँ

घटनाविवरण
दांडी मार्च की शुरुआतमहात्मा गांधी ने 12 मार्च, 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी यात्रा शुरू की।
नमक कानून तोड़ना6 अप्रैल, 1930 को दांडी पहुंचकर गांधी जी ने समुद्र तट पर नमक बनाकर ब्रिटिश सरकार के नमक कानून का उल्लंघन किया।
देशव्यापी सविनय अवज्ञा आंदोलनदांडी मार्च के बाद पूरे देश में सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू हुआ। लोगों ने नमक बनाया, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया और कर नहीं दिया।
हजारों की गिरफ्तारीआंदोलन के दौरान हजारों लोगों को ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार किया।
आंदोलन का प्रभावदांडी मार्च ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी और दुनिया भर में भारत के स्वतंत्रता संग्राम के लिए समर्थन जुटाया।
दांडी मार्च की महत्वपूर्ण घटनाएँ

प्रारंभिक आयोजन

गांधी जी ने 23 जनवरी 1930 को वायसराय लॉर्ड इरविन को एक पत्र लिखकर नमक टैक्स को रद्द करने की मांग की थी। जब उनकी मांगों को खारिज कर दिया गया, तो उन्होंने दांडी मार्च शुरू करने का फैसला किया। इस मार्च की योजना गांधी जी और उनके समर्थकों द्वारा सबरमती आश्रम में बनाई थी। उन्होंने नमक सत्याग्रह के बारे में लोगों को शिक्षित करने और उन्हें आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित करने के लिए कई बैठकें और सभाएं आयोजित कीं। 

जन जागरूकता

गांधी जी और उनके समर्थकों ने गुजरात के कई गांवों और शहरों का दौरा किया। उन्होंने जन जागरूकता के लिए सभाएं कीं और भाषण दिए, जिसमें उन्होंने ब्रिटिश शासन की अन्यायपूर्ण नीतियों की आलोचना की और भारतीय स्वतंत्रता का आह्वान किया। हजारों भारतीय गांधी जी के समर्थन में शामिल हुए और नमक सत्याग्रह में भाग लिया। ब्रिटिश सरकार ने यात्रियों को रोकने की कोशिश की, लेकिन वे अहिंसक रहें और आगे बढ़ते रहें।

अंतिम चरण

5 अप्रैल 1930 को गांधी जी ने दांडी के लिए आखिरी चरण की यात्रा शुरू की।ब्रिटिश सरकार के नमक कानून के अनुसार बिना ब्रिटिश सरकार के अनुमति के और टैक्स भरे बिना कोई भी सागर के पानी से नमक का उत्पाद नहीं कर सकता था। महात्मा गांधी और उनके अनुयायियों ने 5 अप्रैल 1930 को समुद्र तट पर पहुंचकर सुबह के करीब 8.30 बजे वास्पीकरण विधि द्वारा सागर के पानी से नमक बनाया, जो अंग्रेजों के नमक कानून का सीधा उल्लंघन था। 

यह घटना न केवल प्रतीकात्मक थी, बल्कि इससे लोगों को यह संदेश मिला कि अंग्रेजी शासन के अन्यायपूर्ण कानूनों का विरोध कैसे किया जा सकता है। इस अंतिम चरण ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा और दिशा दी, और पूरे देश में विरोध प्रदर्शनों की लहर दौड़ गई।

इस कदम से भारतीय जनता को यह विश्वास हुआ कि वे अपने अधिकारों के लिए खड़े हो सकते हैं और ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण कानूनों का अहिंसात्मक तरीके से विरोध कर सकते हैं।

नमक सत्याग्रह आंदोलन का प्रभाव | Impact of the Movement

  • सविनय अवज्ञा आंदोलन को विभिन्न प्रांतों में अलग-अलग रूपों में शुरू किया गया, जिसमें विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार पर विशेष ज़ोर दिया गया।
  • पूर्वी भारत में चौकीदारी कर का भुगतान करने से इनकार कर दिया गया, जिसके अंतर्गत नो-टैक्स अभियान (No-Tax Campaign) बिहार में अत्यधिक लोकप्रिय हुआ।
  • जे.एन. सेनगुप्ता ने बंगाल में सरकार द्वारा प्रतिबंधित पुस्तकों को खुलेआम पढ़कर सरकारी कानूनों की अवहेलना की।
  • महाराष्ट्र में वन कानूनों की अवहेलना बड़े पैमाने पर की गई।
  • यह आंदोलन अवध, उड़ीसा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और असम के प्रांतों में आग की तरह फैल गया।

दांडी मार्च ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को कैसे प्रभावित किया?

राष्ट्रीय आंदोलन

  1. जन जागरूकता और समर्थन: दांडी मार्च ने देशभर में जन जागरूकता बढ़ाई और लोगों में राष्ट्रीय आंदोलन के प्रति उत्साह और समर्थन को मजबूत किया। गांव-गांव, शहर-शहर लोग इस आंदोलन में शामिल हुए और नमक कानून का उल्लंघन करने लगे।
  2. ब्रिटिश हुकूमत पर दबाव: दांडी मार्च ने ब्रिटिश हुकूमत पर दबाव बढ़ाया। नमक कानून के उल्लंघन के बाद अंग्रेजों ने हजारों लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन इससे आंदोलन और भी तेज हो गया। इससे ब्रिटिश सरकार को यह समझ में आया कि भारतीय जनता को अब और दबाया नहीं जा सकता।
  3. महात्मा गांधी की प्रतिष्ठा: इस मार्च ने महात्मा गांधी की प्रतिष्ठा और भी बढ़ाई। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेता बन गए और उनकी अहिंसक रणनीति को वैश्विक मान्यता मिली।

ब्रिटिश प्रतिक्रिया

दांडी यात्रा के दौरान ब्रिटिश सरकार ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में हो रहे सत्याग्रह को दबाने के लिए कठोर उपाय अपनाए। यात्रा के बाद, गांधी सहित हजारों नेताओं को गिरफ्तार किया गया और नमक कानूनों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी सजा दी गई। ब्रिटिश अधिकारियों ने यात्रा के दौरान भारतीयों पर निगरानी रखी और सत्याग्रह को दबाने के लिए हिंसक तरीकों का सहारा लिया।

दांडी यात्रा के समय ब्रिटिश भारत के वायसराय लॉर्ड इरविन (उर्फ विलियम रॉबर्ट फिलिप जॉर्ज, 1931 तक) थे। उन्होंने गांधी से वार्ता करने के बाद कई कड़े कदम उठाए, लेकिन आंदोलन का प्रभाव लंबे समय तक रहा।

दांडी मार्च का महत्व

स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका

  • स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा: इस मार्च के बाद स्वतंत्रता संग्राम ने और जोर पकड़ा। नमक सत्याग्रह के बाद कई और आंदोलनों की शुरुआत हुई, जो अंततः भारत की स्वतंत्रता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुए।
  • ब्रिटिश शासन की कमजोरी उजागर: इस मार्च ने ब्रिटिश सरकार को दिखाया कि उनके कानून कितने अन्यायपूर्ण और अव्यवहारिक हैं। इससे ब्रिटिश शासन की प्रतिष्ठा को गहरा धक्का लगा।
  • जनता की भागीदारी: दांडी मार्च ने लाखों भारतीयों को स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

अंतरराष्ट्रीय समर्थन

  • अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने दांडी यात्रा को प्रमुखता से कवर किया।
  • इससे दुनिया भर के लोगों को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की जानकारी मिली।
  • कई विदेशी अखबारों और पत्रिकाओं ने गांधी जी और उनके अनुयायियों की साहसिक यात्रा और नमक सत्याग्रह की प्रशंसा की।
  • अमेरिका, ब्रिटेन, और अन्य देशों के नागरिकों और नेताओं ने इस आंदोलन का समर्थन किया।
  • कई विदेशी बुद्धिजीवियों और समाज सुधारकों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रति सहानुभूति व्यक्त की।
  • गांधी जी के अहिंसक प्रतिरोध की रणनीति को वैश्विक स्तर पर सराहा गया।
  • इस प्रकार, दांडी मार्च का महत्व वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित हुआ।

अहिंसक विरोध

अहिंसक विरोध को लेकर दांडी मार्च काफी महत्वपूर्ण था। महात्मा गांधी ने इस मार्च के माध्यम से यह दिखाया की बिना हिंसा के भी अन्यायपूर्ण कानूनों का विरोध किया जा सकता है। लोग बिना हथियार उठाए, सिर्फ अपने साहस और दृढ़ संकल्प से अन्याय के खिलाफ खड़े हो सकते हैं। दांडी मार्च ने अहिंसक प्रतिरोध की ताकत को साबित किया। इसने दुनिया को दिखाया कि अहिंसक प्रतिरोध भी शक्तिशाली हो सकता है। 

इस तरह, दांडी मार्च को लेकर ब्रिटिश की प्रतिक्रिया कड़ी थी, लेकिन यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा और दिशा देने में सफल रहा।

निष्कर्ष

दांडी मार्च ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मोड़ लाया। महात्मा गांधी के नेतृत्व में इस अहिंसक आंदोलन ने ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण नमक कानून का विरोध किया और भारतीयों को आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। इस मार्च ने न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में ब्रिटिश शासन के खिलाफ जन जागरूकता और समर्थन को बढ़ावा दिया। दांडी मार्च ने स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी और लाखों लोगों को प्रेरित किया, यह दर्शाते हुए कि सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। इसने भारतीयों के आत्मसम्मान और स्वतंत्रता की भावना को मजबूत किया और स्वतंत्रता प्राप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

दांडी मार्च क्यों प्रसिद्ध है?

दांडी मार्च ब्रिटिश नमक कानून के खिलाफ महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुआ एक अहिंसक आंदोलन था। इसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी और वैश्विक जन जागरूकता बढ़ाई।

दांडी मार्च कितने दिनों तक चला था?

दांडी मार्च 24 दिनों तक चला था। यह 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से शुरू हुआ और 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुंचा था।

दांडी मार्च क्या है कक्षा 10?

दांडी मार्च, महात्मा गांधी के नेतृत्व में 12 मार्च 1930 को शुरू हुआ एक अहिंसक आंदोलन था। इसका उद्देश्य ब्रिटिश नमक कानून का विरोध करना था। गांधीजी और अनुयायियों ने 240 मील की यात्रा कर समुद्र तट पर नमक बनाकर इस कानून को तोड़ा।

महात्मा गांधी ने दांडी की ओर मार्च क्यों किया?

महात्मा गांधी ने दांडी की ओर मार्च ब्रिटिश सरकार के अन्यायपूर्ण नमक कानून का विरोध करने के लिए किया था। यह कानून भारतीयों को अपने ही देश में नमक बनाने से रोकता था, जिससे उन्हें ब्रिटिश सरकार से महंगा नमक खरीदना पड़ता था। गांधीजी ने इस कानून को तोड़ने के लिए 240 मील की यात्रा कर दांडी में समुद्र तट पर नमक बनाया, जिससे ब्रिटिश शासन के खिलाफ जन जागरूकता और समर्थन बढ़ा।

दांडी मार्च का दूसरा नाम क्या है?

दांडी मार्च का दूसरा नाम नमक सत्याग्रह है।

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